लूणी नदी जीवनदायिनी या अभिशाप । Luni River in Hindi

लूनी नदी जीवन दायिनी या अभिशापलूणी नदी एक परिचय

परिचय – लूणी नदी पश्चिमी राजस्थान की प्रमुख नदियों में से एक है ! नदी का नाम लूणी या  लवणावरी (नमक की नदी) या मरु गंगा, सागरमती  के नाम से भी जाना जाता है वर्तमान में लूनी नदी जीवनदायिनी एक अभिशाप बनती जा रही है ! लूणी नदी  का नाम संस्कृत के लवणावरी (नमक की नदी) से लिया गया है ! अत्यधिक लवणता के कारण कहा जाता है ! राजस्थान में यह 330 किलोमीटर और कुल लंबाई 495 किलोमीटर तक है, बाद में यह गुजरात के कच्छ के रण में सूख जाती है !

लूणी नदी का उद्धगम

इस नदी का उद्गम स्थान अजमेर के पास अरावली पर्वतमाला के 772 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नाग की पहाड़ियों से होता है ! अजमेर से निकलकर राजस्थान के नागौर, जोधपुर, पाली, बाड़मेर, जालौर जिलों से होकर बहती है अंत में गुजरात के कच्छ के रण में विलुप्त हो जाती है !

सहायक नदियां

जोजरी,  मीठड़ी, लिलडी,  बांडी, सुकड़ी, जवाई, खारी, सगाई !

लूणी व सहायक नदियां पर बांध

  1. दांतीवाड़ा बांध
  2.  सिपु बांध
  3. जसवंत सागर बांध –  महाराजा जसवंत सिंह द्वारा 1892 में बनाया गया था यह भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम जिलों में से एक है !
  4. हेमावास बांध – खारी नदी ( बांडी की सहायक पर पाली में है)
  5. सरदार समंद बांध –  पाली बांडी नदी पर है
  6. जवाई बांध  -जवाई नदी पर यह पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बांध है
  7. बांकली बांध  – सुकड़ी नदी पर जालौर सुकड़ी नदी के किनारे पर स्थित है

नदी पर सिंचाई की दो प्रमुख परियोजनाएं सरदार समंद और जवाई बांध है !

लूणी नदी का वर्तमान अस्तित्व

रासायनिक लूणी नदी 

मारवाड़ की मरूगंगा के नाम से विख्यात लूणी नदी आज रासायनिक नदी बन चुकी है! पाली के औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों से केमिकल युक्त रासायनिक पानी को नदी मे छोड़ा जाता है ! पाली मे रसायन युक्त दूषित पानी के शुद्धिकरण के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा जो प्लांट लगा है ! वह एक मात्र दिखावा है. क्योंकि नित्य प्रवाह से यथोचित पानी प्रतिदिन आगे बढ़ रहा है ! अब अजीत समदड़ी क्षेत्र तक पहुंच चुका है, जो पाली से 70 से 80 किलोमीटर दूर है ! यह जीवन रेखा आज एक गंदे नाले में परिवर्तित होती जा रही है !

पेयजल व सिंचाई स्रोत

नदी का दूषित पानी अब पेयजल व सिंचाई के स्रोत कुओं को भी दूषित कर रहा है ! जन स्वास्थ्य अभियांत्रिक विभाग के नदी किनारे खुदे हुए कुए भी दूषित पानी से लबालब होते जा रहे हैं ! कुआं से जीएलआर में हो रही आपूर्ति के पानी का रंग हरा हो रहा है ! जिस कारण संक्रमण रोग फैलने का भय बना हुआ है ! केमिकल युक्त पानी दैनिक उपयोग से ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है !

नुकसान

 दुछित पानी बहने से नदी गंदगी की भेंट चढ़ी ही है, साफ पानी से सिंचित हुए कुओं में भी जहर घोल रहा है ! फसलों का असमय खराब होना रासायनिक पानी पीने से मवेशियों में संक्रमण बीमारियों का होना, तथा अकाल मौत होने का मुख्य कारण है ! रसायन युक्त पानी में विचरण व पीने से मादा मवेशियों में गर्भधारण करने की क्षमता समाप्त हो रही है !  दुग्ध उत्पादन प्रभावित हो रहा है ! जिससे किसानों का भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है !

लूणी नदी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी | Luni River GK in Hindiनदी पर नेताजी

किसानों व ग्रामीणों को रसायन युक्त पानी से आ रही दुविधाओं को कई बार नेताओं अफसरों को बताते आ रहे हैं ! सस्ती लोकप्रियता के लिए हर बार नेता आते हैं ! दूषित पानी के पास खड़े होकर फोटो खिंचवा कर चले जाते हैं ! यही होता आ रहा है ! लूणी नदी किनारे लगभग 4 से 5 एमएलए तथा 3 सांसद हैं, लेकिन इस समस्या का हल अभी तक नहीं निकाल सके है ! करीब 20 साल से भी ज्यादा का समय हो गया है ! इतने समय मे दोनो बड़ी पार्टी कांग्रेस व भाजपा ने राज किया लेकिन मजाल है ! किसी नेता ने इसके स्थाई समाधान के लिए प्रयास किया हो !

अच्छे दिनों का वादा करके दुशरी बार केंद्र में भाजपा की सरकार बनी है ! माननीय केंद्रीय जल मंत्री गजेन्द्रसिंहशेखावत ने इस बार जल शक्ति अभियान से षुरूआत की तो खर्चा भी करोड़ो में होगा ! ऐसा ही पूर्व में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जलस्वालंबनयोजना पर करोड़ो खर्च कर पानी के बचाने पर जोर दिया था ! लेकिन पाली,जोधपुर तथा बाड़मेर के हजारों गांवो के लाखों किसानों की जीवनदायिनी लूणी नदी हर साल प्रदूषित हो रही है ! कुओं में जहर घोल रहे कैमिकल पानी के रोक पर कोई ध्यान नही ! हर बार इसकी टोपी उसके सर करने वाले नेता क्या कहेंगे जब इस बार राजस्थान में कांग्रेस तो केंद्र में भाजपा सरकार राज कर रही है ! उम्मीद है लाखों किसानों की समस्या का स्थाई समाधान होगा !

किसानों की समस्या

सिचाई का एकमात्र सहारा लूणी नदी का भूमिगत जल है ! लेकिन नियमित केमिकल युक्त पानी आने से कुआं में उसका रिचाव हो रहा है ! और हर वर्ष पैदावार कम होती जा रही है ! पिछले तीन वर्षों में लूणी नदी में जल प्रवाह होने से कुँओं में जल स्तर बढ़ा है ! इस वर्ष जीरा, रायड़ा, इसबगोल व गेंहू की बम्पर बुवाई के होने उपरांत भी पिछले वर्ष गर्मियों में पाली की ओद्योगिक इकाइयों से केमिकल युक्त दूषित पानी के प्रवाह के कारण पैदावार एक चौथाई मात्र से भी कम हुई जो कि चिंता का विषय है ! वर्तमान में पुन: दूषित केमिकल युक्त पानी के प्रवाह के कारण उपजाऊ जमीन बंजर हो रही है !जो कि क्षैत्र के किसान भाइयों के सामने रोजगार का बड़ा संकट  खड़ा हो रहा है ! ‌और अन्नदाता को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है !

लूणी नदी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी | Luni River GK in Hindiबजरी खनन व माफिया

नदी के अंदर बजरी के खनन से खोदे गए बड़े-बड़े गड्ढों में केमिकल युक्त पानी के भराव से तटवर्तीय गांवों के कुआं में रासायनिक पानी के रिसाव होने की समस्या बढ़ गई है !

बजरी खनन के बेलगाम कारोबार के कारण हमारे पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ता जा रहा है ! और इसका सीधा असर बारिश गर्मी सर्दी भूमिगत जलस्तर आदि पर होता है !

मोटी कमाई और ऊंची राजनीति पहुंच के कारण यह कारोबार अपनी गति से चलता जा रहा है ! नियमों को ताक पर रखकर व सरकारी तंत्र की मिलीभगत से नदी के अंदर कई ऐसी लीजे दे रखी है ! जो नदी से 500 मीटर की दूरी पर होनी चाहिए लेकिन देखने से ऐसा कभी नहीं लगता मानो नदी के अंदर दे रखी है !

ग्रामीणों के द्वारा ऐसी सैकड़ों शिकायतें आती रहती है ! कि लीज धारक अपने क्षेत्र के बाहर नदी के अंदर अवैध रूप से बजरी का खनन करता है और नदी को नुकसान पहुंचाया जा रहा है !

साथ ही लीज धारको ने नदी में ग्रेवल सड़क तक का निर्माण कर रखा है ! जिससे नदी की धारा के अस्तित्व को खतरा है ! लूणी नदी में बजरी की सैकड़ों लीजो से अंधाधुन सप्लाई की जा रही है ! यहां से बजरी राजस्थान के हर कोने में पहुंच रही है!

ऐसा ही चलता रहा तो साल भर में नदी वह नदी किनारे बजरी सिर्फ नाम मात्र ही रह जाएगी इससे तो नदी का अस्तित्व ही मिट जाएगा !

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